वो खुशी की नहीं… दर्द छुपाने की आदत है।
दुनिया तो टूटते हुए तारे से भी दुआ माँगती है,
शहर ज़ालिमों का है साहब, जरा संभल कर चलना,
जिसे चाहे उसी से सबसे ज़्यादा दर्द पाता है।
मैं तुझे भी रुला दू तेरे सितम सुना सुना कर…!
जख्म दिल के पुराने, दर्द अभी भी ताज़ा है,
किसने छुप के या खुलेआम किया प्यार नहीं।
नया कपड़ा क्या पहन लिया अब तो Sad Shayari in Hindi बात भी नही करते…!
मोहब्बत मार डालेगी अभी तुम फूल जैसे हो…!
सुना है गैरो ने पैरो तले रक्खा है तुम्हे…!
अब मैं उन्हें खुश भी न देखूं तो प्यार कैसा।
मैं इतना ज़रूरी तो नहीं कि तुम्हें याद आ जाऊँ,
कुछ कहानियाँ बिना अलविदा कहे ही खत्म हो जाती हैं,
कम से कम उसकी सारी तमन्नाएं तो पूरी हो गई।